वाल्मीकि रामायण 5.58.52
ततः सीतामपश्यंस्तु रावणस्य निवेशने ।शोकसागरमासाद्य न पारमुपलक्षये॥
tataḥ sītāmapaśyaṃstu rāvaṇasya niveśane |śokasāgaramāsādya na pāramupalakṣaye ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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