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वाल्मीकि रामायण 5.58.54
स प्राकारमवप्लुत्य पश्यामि बहुपादपम्॥
sa prākāramavaplutya paśyāmi bahupādapam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंस प्राकारमवप्लुत्य पश्यामि बहुपादपम्॥
sa prākāramavaplutya paśyāmi bahupādapam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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