वाल्मीकि रामायण 5.58.56
अदूरे शिंशुपावृक्षात् पश्यामि वरवर्णिनीम् ।श्यामां कमलपत्राक्षीमुपवासकृशाननाम्॥
adūre śiṃśupāvṛkṣāt paśyāmi varavarṇinīm |śyāmāṃ kamalapatrākṣīmupavāsakṛśānanām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें