वाल्मीकि रामायण 5.58.57
तदेकवासःसंवीतां रजोध्वस्तशिरोरुहाम् ।शोकसन्तापदीनाङ्गीं सीतां भर्तृहिते स्थिताम्॥
tadekavāsaḥsaṃvītāṃ rajodhvastaśiroruhām |śokasantāpadīnāṅgīṃ sītāṃ bhartṛhite sthitām ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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