वाल्मीकि रामायण 5.58.67
तामुवाच दशग्रीवः सीतां परमदुःखिताम् ।अवाक्छिराः प्रपतितो बहुमन्यस्व मामिति॥
tāmuvāca daśagrīvaḥ sītāṃ paramaduḥkhitām |avākchirāḥ prapatito bahumanyasva māmiti ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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