वाल्मीकि रामायण 5.58.74
विवर्त्य नयने क्रूरे मुष्टिमुद्यम्य दक्षिणम् ।मैथिलीं हन्तुमारब्धः स्त्रीभिर्हा हा कृतं तदा॥
vivartya nayane krūre muṣṭimudyamya dakṣiṇam |maithilīṃ hantumārabdhaḥ strībhirhā hā kṛtaṃ tadā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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