वाल्मीकि रामायण 5.58.82
ततस्ताः सहिताः सर्वा विहताशा निरुद्यमाः ।परिक्षिप्य समन्तात्तां निद्रावशमुपागताः॥
tatastāḥ sahitāḥ sarvā vihatāśā nirudyamāḥ |parikṣipya samantāttāṃ nidrāvaśamupāgatāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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