वाल्मीकि रामायण 5.58.87
अलमस्मात् परित्रातुं राघवाद्राक्षसीगणम् ।अभियाचाम वैदेहीमेतद्धि मम रोचते॥
alamasmāt paritrātuṃ rāghavādrākṣasīgaṇam |abhiyācāma vaidehīmetaddhi mama rocate ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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