वाल्मीकि रामायण 5.58.93
श्रुत्वा तु गदितां वाचं राजर्षिगणपूजिताम् ।प्रत्यभाषत मां देवी बाष्पैः पिहितलोचना॥
śrutvā tu gaditāṃ vācaṃ rājarṣigaṇapūjitām |pratyabhāṣata māṃ devī bāṣpaiḥ pihitalocanā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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