वाल्मीकि रामायण 5.58.94
कस्त्वं केन कथं चेह प्राप्तो वानरपुङ्गव ।का च रामेण ते प्रीतिस्तन्मे शंसितुमर्हसि॥
kastvaṃ kena kathaṃ ceha prāpto vānarapuṅgava |kā ca rāmeṇa te prītistanme śaṃsitumarhasi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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