वाल्मीकि रामायण 5.58.99
एतच्छ्रुत्वा विदित्वा च सीता जनकनन्दिनी ।आह रावणमुत्साद्य राघवो मां नयत्विति॥
etacchrutvā viditvā ca sītā janakanandinī |āha rāvaṇamutsādya rāghavo māṃ nayatviti ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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