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वाल्मीकि रामायण 5.58.9
स्थितं पन्थानमावृत्य मेने विघ्नं च तं नगम्॥
sthitaṃ panthānamāvṛtya mene vighnaṃ ca taṃ nagam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंस्थितं पन्थानमावृत्य मेने विघ्नं च तं नगम्॥
sthitaṃ panthānamāvṛtya mene vighnaṃ ca taṃ nagam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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