वाल्मीकि रामायण 5.59.23
जयत्यतिबलो रामो लक्ष्मणश्च महाबलः ।राजा जयति सुग्रीवो राघवेणाभिपालितः॥
jayatyatibalo rāmo lakṣmaṇaśca mahābalaḥ |rājā jayati sugrīvo rāghaveṇābhipālitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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