वाल्मीकि रामायण 5.59.9
अहं तु रावणं युद्धे ससैन्यं सपुरस्सरम् ।सहपुत्रं वधिष्यामि सहोदरयुतं युधि॥
ahaṃ tu rāvaṇaṃ yuddhe sasainyaṃ sapurassaram |sahaputraṃ vadhiṣyāmi sahodarayutaṃ yudhi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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