वाल्मीकि रामायण 5.6.1
स निकामम् विमानेषु विषण्णः काम रूपधृत् ।विचचार पुनर्लङ्काम् लाघवेन समन्वितः॥
sa nikāmam vimāneṣu viṣaṇṇaḥ kāma rūpadhṛt |vicacāra punarlaṅkām lāghavena samanvitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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