वाल्मीकि रामायण 5.66.15
मधुरा मधुरालापा किमाह मम भामिनी ।मद्विहीना वरारोहा हनुमन् कथयस्व मे॥
madhurā madhurālāpā kimāha mama bhāminī |madvihīnā varārohā hanuman kathayasva me ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें