वाल्मीकि रामायण 5.66.2
तं तु दृष्ट्वा मणिश्रेष्ठं राघवः शोककर्शितः ।नेत्राभ्यामश्रुपूर्णाभ्यां सुग्रीवमिदमब्रवीत्॥
taṃ tu dṛṣṭvā maṇiśreṣṭhaṃ rāghavaḥ śokakarśitaḥ |netrābhyāmaśrupūrṇābhyāṃ sugrīvamidamabravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें