वाल्मीकि रामायण 5.67.25
वैदेह्या वचनं श्रुत्वा करुणं साश्रुभाषितम् ।पुनरप्यहमार्यां तामिदं वचनमब्रुवम्॥
vaidehyā vacanaṃ śrutvā karuṇaṃ sāśrubhāṣitam |punarapyahamāryāṃ tāmidaṃ vacanamabruvam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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