वाल्मीकि रामायण 5.68.10
तदस्मिन् कार्यनिर्योगे वीरैवं दुरतिक्रमे ।किं पश्यसि समाधानं ब्रूहि कार्यविदां वर॥
tadasmin kāryaniryoge vīraivaṃ duratikrame |kiṃ paśyasi samādhānaṃ brūhi kāryavidāṃ vara ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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