वाल्मीकि रामायण 5.68.15
तद्यथा तस्य विक्रान्तमनुरूपं महात्मनः ।भवत्याहवशूरस्य तथा त्वमुपपादय॥
tadyathā tasya vikrāntamanurūpaṃ mahātmanaḥ |bhavatyāhavaśūrasya tathā tvamupapādaya ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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