वाल्मीकि रामायण 5.68.20
असकृत्तैर्महाभागैर्वानरैर्बलदर्पितैः ।प्रदक्षिणीकृता भूमिर्वायुमार्गानुसारिभिः॥
asakṛttairmahābhāgairvānarairbaladarpitaiḥ |pradakṣiṇīkṛtā bhūmirvāyumārgānusāribhiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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