वाल्मीकि रामायण 5.68.8
कथं नु खलु दुष्पारं तरिष्यन्ति महोदधिम् ।तानि हर्यृक्षसैन्यानि तौ वा नरवरात्मजौ॥
kathaṃ nu khalu duṣpāraṃ tariṣyanti mahodadhim |tāni haryṛkṣasainyāni tau vā naravarātmajau ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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