वाल्मीकि रामायण 5.9.18
चन्दनेन च रक्तेन तपनीयनिभेन च ।सुपुण्यगन्धिना युक्तमादित्यतरुणोपमम्॥
candanena ca raktena tapanīyanibhena ca |supuṇyagandhinā yuktamādityataruṇopamam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें