वाल्मीकि रामायण 5.9.19
कूटागारैर्वराकारैर्विविधैः समलम्कृतम् ।विमानम् पुष्पकम् दिव्यम् आरुरोह महा कपिः॥
kūṭāgārairvarākārairvividhaiḥ samalamkṛtam |vimānam puṣpakam divyam āruroha mahā kapiḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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