वाल्मीकि रामायण 6.1.3
न हि तम् परिपश्यामि यस्तरेत महोदधिम् ।अन्यत्र गुरुडाद्वायोरन्यत्र च हनूमतः॥
na hi tam paripaśyāmi yastareta mahodadhim |anyatra guruḍādvāyoranyatra ca hanūmataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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