वाल्मीकि रामायण 6.10.2
शैलाग्रचयसम्काशम् शैलशृज्~गमिवोन्नतम् ।सुविभक्तमहाकक्षम् महाजनपरिग्रहम्॥
śailāgracayasamkāśam śailaśṛj~gamivonnatam |suvibhaktamahākakṣam mahājanaparigraham ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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