वाल्मीकि रामायण 6.10.8
पुण्यान् पुण्याहघोषाम्श्च वेदिविद्भिरुदाहृतान् ।शुश्राव सुमहातेजा भ्रातुर्विजयसम्श्रितान्॥
puṇyān puṇyāhaghoṣāmśca vedividbhirudāhṛtān |śuśrāva sumahātejā bhrāturvijayasamśritān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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