वाल्मीकि रामायण 6.101.10
तदस्त्रं तु हतं दृष्ट्वा रावणो राक्षसाधिपः ।विव्याध दशभिर्बाणै रामं सर्वेषु मर्मसु॥
tadastraṃ tu hataṃ dṛṣṭvā rāvaṇo rākṣasādhipaḥ |vivyādha daśabhirbāṇai rāmaṃ sarveṣu marmasu ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें