वाल्मीकि रामायण 6.101.11
स विद्धो दशभिर्बाणैर्महाकार्मुकनिस्सृतैः ।रावणेन महातेजा न प्राकम्पत राघवः॥
sa viddho daśabhirbāṇairmahākārmukanissṛtaiḥ |rāvaṇena mahātejā na prākampata rāghavaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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