वाल्मीकि रामायण 6.101.14
तैः सायकैर्महावेगै रावणस्य महाद्युतिः ।ध्वजं मनुष्यशीर्षं तु तस्य चिच्छेद नैकधा॥
taiḥ sāyakairmahāvegai rāvaṇasya mahādyutiḥ |dhvajaṃ manuṣyaśīrṣaṃ tu tasya ciccheda naikadhā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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