वाल्मीकि रामायण 6.101.18
हताश्वाद्वेगवान् वेगादवप्लुत्य महारथात् ।क्रोधमाहारयत्तीव्रं भ्रातरं प्रति रावणः॥
hatāśvādvegavān vegādavaplutya mahārathāt |krodhamāhārayattīvraṃ bhrātaraṃ prati rāvaṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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