वाल्मीकि रामायण 6.101.19
ततः शक्तिं महाशक्तिर्दीप्तां दींप्ताशनीमिव ।विभीषणाय चिक्षेप राक्षसेन्द्रः प्रतापवान्॥
tataḥ śaktiṃ mahāśaktirdīptāṃ dīṃptāśanīmiva |vibhīṣaṇāya cikṣepa rākṣasendraḥ pratāpavān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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