वाल्मीकि रामायण 6.101.20
अप्राप्तामेव तां बाणैस्त्रिभिश्चिच्छेद लक्ष्मणः ।अथोदतिष्ठत् सन्नादो वानराणां तदा रणे॥
aprāptāmeva tāṃ bāṇaistribhiściccheda lakṣmaṇaḥ |athodatiṣṭhat sannādo vānarāṇāṃ tadā raṇe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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