वाल्मीकि रामायण 6.101.23
सा वेगिता बलवता रावणेन दुरासदा ।जज्वाल सुमहाघोरा शक्राशनिसमप्रभा॥
sā vegitā balavatā rāvaṇena durāsadā |jajvāla sumahāghorā śakrāśanisamaprabhā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें