वाल्मीकि रामायण 6.101.24
एतस्मिन्नन्तरे वीरो लक्ष्मणस्तं विभीषणम् ।प्राणसंशयमापन्नं तूर्णमभ्यवपद्यत॥
etasminnantare vīro lakṣmaṇastaṃ vibhīṣaṇam |prāṇasaṃśayamāpannaṃ tūrṇamabhyavapadyata ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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