वाल्मीकि रामायण 6.101.26
कीर्यमाणः शरौघेण विसृष्टेन महात्मना ।स प्रहर्तुं मनश्चक्रे विमुखीकृतविक्रमः॥
kīryamāṇaḥ śaraugheṇa visṛṣṭena mahātmanā |sa prahartuṃ manaścakre vimukhīkṛtavikramaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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