वाल्मीकि रामायण 6.101.34
रावणेन रणे शक्तिः क्रुद्धेनाशीविषोपमा ।मुक्ता ऽ ऽशूरस्यभीतस्य लक्ष्मणस्य ममज्ज सा॥
rāvaṇena raṇe śaktiḥ kruddhenāśīviṣopamā |muktā ' 'śūrasyabhītasya lakṣmaṇasya mamajja sā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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