वाल्मीकि रामायण 6.101.38
स मुहूर्तमनुध्याय बाष्पव्याकुललोचनः ।बभूव संरब्धतरो युगान्त इव पावकः॥
sa muhūrtamanudhyāya bāṣpavyākulalocanaḥ |babhūva saṃrabdhataro yugānta iva pāvakaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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