वाल्मीकि रामायण 6.101.41
तामपि प्रहितां शक्तिं रावणेन बलीयसा ।यत्नतस्ते हरिश्रेष्ठा न शेकुरवमर्दितुम्॥
tāmapi prahitāṃ śaktiṃ rāvaṇena balīyasā |yatnataste hariśreṣṭhā na śekuravamarditum ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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