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वाल्मीकि रामायण 6.101.42
अर्दिताश्चैव बाणौघैः क्षिप्रहस्तेन रक्षसा॥
arditāścaiva bāṇaughaiḥ kṣiprahastena rakṣasā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंअर्दिताश्चैव बाणौघैः क्षिप्रहस्तेन रक्षसा॥
arditāścaiva bāṇaughaiḥ kṣiprahastena rakṣasā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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