वाल्मीकि रामायण 6.101.51
प्राप्तं दुःखं महद्घोरं क्लेशं च निरयोपमम् ।अद्य सर्वमहं त्यक्ष्ये निहत्वा रावणं रणे॥
prāptaṃ duḥkhaṃ mahadghoraṃ kleśaṃ ca nirayopamam |adya sarvamahaṃ tyakṣye nihatvā rāvaṇaṃ raṇe ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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