वाल्मीकि रामायण 6.101.58
एवमुक्त्वा शितैर्बाणैस्तप्तकाञ्चनभूषणैः ।आजघान दशग्रीवं रणे रामः समाहितः॥
evamuktvā śitairbāṇaistaptakāñcanabhūṣaṇaiḥ |ājaghāna daśagrīvaṃ raṇe rāmaḥ samāhitaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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