वाल्मीकि रामायण 6.102.11
देशे देशे कलत्राणि देशे देशे च बान्धवाः ।तं तु देशं न पश्यामि यत्र भ्राता सहोदरः॥
deśe deśe kalatrāṇi deśe deśe ca bāndhavāḥ |taṃ tu deśaṃ na paśyāmi yatra bhrātā sahodaraḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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