वाल्मीकि रामायण 6.102.27
स नीलमिव जीमूतं तोयपूर्णं नभस्थलात् ।आपपात गृहीत्वा तु हनुमान् शिखरं गिरेः॥
sa nīlamiva jīmūtaṃ toyapūrṇaṃ nabhasthalāt |āpapāta gṛhītvā tu hanumān śikharaṃ gireḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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