वाल्मीकि रामायण 6.102.31
विस्मितास्तु बभूवुस्ते रणे वानरराक्षसाः ।दृष्ट्वा हनुमतः कर्म सुरैरपि सुदुष्करम्॥
vismitāstu babhūvuste raṇe vānararākṣasāḥ |dṛṣṭvā hanumataḥ karma surairapi suduṣkaram ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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