वाल्मीकि रामायण 6.105.1
स तेन तु तथा क्रोधात् काकुत्स्थेनार्दितो रणे ।रावणः समरश्लाघी महाक्रोधमुपागमत्॥
sa tena tu tathā krodhāt kākutsthenārdito raṇe |rāvaṇaḥ samaraślāghī mahākrodhamupāgamat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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