वाल्मीकि रामायण 6.105.28
यदा च शस्त्रं नारेभे न व्यकर्षच्छरासनम् ।नास्य प्रत्यकरोद्वीर्यं विक्लेवेनान्तरात्मना॥
yadā ca śastraṃ nārebhe na vyakarṣaccharāsanam |nāsya pratyakarodvīryaṃ viklevenāntarātmanā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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