वाल्मीकि रामायण 6.105.6
ततः शरसहस्राणि क्षिप्रहस्तो निशाचरः ।निजघानोरसि क्रुद्धो राघवस्य महात्मनः॥
tataḥ śarasahasrāṇi kṣiprahasto niśācaraḥ |nijaghānorasi kruddho rāghavasya mahātmanaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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