वाल्मीकि रामायण 6.106.13
नास्मिन्नर्थे महाराज त्वं मां प्रियहिते रतम् ।कश्चिल्लघुरिवानार्यो दोषतो गन्तुमर्हसि॥
nāsminnarthe mahārāja tvaṃ māṃ priyahite ratam |kaścillaghurivānāryo doṣato gantumarhasi ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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