वाल्मीकि रामायण 6.106.15
क्षमं तवावगच्छामि महता रणकर्मणा ।न हि ते वीर सौमुख्यं प्रहर्षं वोपधारये॥
kṣamaṃ tavāvagacchāmi mahatā raṇakarmaṇā |na hi te vīra saumukhyaṃ praharṣaṃ vopadhāraye ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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